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गाँव की यादें

राहुल का गाँव शहर के करीब था, जहाँ उसके दादा-दादी, चाचा-चाची और चचेरे भाई-बहन रहते थे। उसके घर के पास ही थोड़ी दूर पर एक विशाल बड़गद का पेड़ था और उसके साथ ही एक तालाब थी जिसमे कि ढ़ेर सारी मछलियाँ रहती थी। राहुल अपने मम्मी-पापा के साथ एक दूसरे शहर में रहता था, जहाँ उसके पापा एक सरकारी विभाग में कार्यरत थे। वहीं शहर में ही उसका स्कूल भी था, जहाँ वह सातवीं क्लास मे था। लेकिन छुट्टियो में वह अपने मम्मी-पापा के साथ गाँव जरुर आता और वहाँ उसे खूब मजा आता था। गाँव में लोग उसे कितने खुशाहाल नजर आते, वहीं शहर में वह देखता कि लोग कितने तनाव व भाग-दौड़ की जिंदगी जी रहे है। गाँव पहुँचते ही उसे ताजगी का एहसास होता। ताजी हवा, चारों ओर हरियाली, खेत-खलिहान, कच्चे-पक्के मकान, ज्यादातर लोग खुश नजर आते। जहाँ शहर में किसी को किसी से कोई मतलब नही, हर कोई अपने ही जिंदगी में परेशान थे, वहीं गाँव में हर सुख-दुख के मौके पर लोग एक-दूसरे का साथ देते थे।

उसके घर के पीछे उसके दादा जी ने एक बगीचा बनवा रखा था, जिसमे कई तरह के फल के पेड़ थे। छुट्टियों में गाँव पहुँचते ही सबसे पहले वह बगीचे की तरफ भागता। आम, अमरुद, केला, अनार ऐसे कई तरह के पेड़ उसके बगीचे में लगे थे, लेकिन सबसे ज्यादा मजा उसे अमरुद के पेड़ से ताजे-ताजे अमरुद तोड़ कर खाने में आता। वहाँ से मन भरने के बाद वह सीधा बड़गद के पेड़ के पास जाता, जहाँ पहले से ही उसके गाँव के साथी उसका इंतजार कर रहे होते थे। उसे वहाँ बहुत मजा आता। कभी वह दोस्तों के साथ बड़गद के तने से लटके जड़ों से लटक कर झूला झूलता, तो कभी दोस्तों के साथ मिलकर तालाब से मछ्ली पकड़ते और लड़को को उसमें तैरते हुए देखकर आनंदित होता। दोपहर में भी वहाँ बड़गद के पेड़ के नीचे कितनी ठंढ़क रहती थी। गाँव के बुजुर्ग लोग बड़गद के पेड़ के नीचे चारपाई बिछा कर ठंढ़ी हवा में लेटे रहते। गिलहरियों को नीचे खेलते देखकर उसे बड़ा मजा आता। पेड़ पर काफी सारी चिड़ियों के घोंसले थे। शाम होते ही चिड़ियों के झुंड़ वापस आते। सुबह और शाम सारा वातावरण चिड़ियों के चहकने की आवाज से गूंज उठता। वह मंत्रमुग्ध हो जाता था।



शहर में जहाँ रोज सुबह उसकी नींद बड़ी ही मुश्किल से टूटती थी, वहीं यहाँ गाँव में चिड़ियों के चहकने की आवाज से उसकी नींद अपने-आप ही टूट जाती थी।

आज सुबह भी उसकी नींद टू‌टी। चिड़ियां चहक रही थी, सूरज अभी पूरी तरह नहीं निकला था। हल्की ठंढ़ी हवा चल रही थी। खेतों में काम करने वाले लोग अपने-अपने जानवरों को लेकर अपने खेत की ओर जा रहे थे। उसे काफी अच्छा लग रहा था। लेकिन तभी उसकी मम्मी ने उसे आवाज लगाई, “ राहुल बेटा, जल्दी उठकर तैयार हो जओ, तुम्हे पता है न कि आज हमें वापस जाना है, पापा की छुट्टी समाप्त हो गयी है।“ वह उदास हो गया और मन ही मन में बोला, “ कितनी जल्दी ये पाँच दिन बीत गये कुछ पता ही नही चला।“ लेकिन वह जानता था कि उसे वापस जाना है। उसके स्कूल की भी छुट्टियाँ समाप्त होने वाली है और उसे होम वर्क भी पूरे करने हैं। वह शहर जाता और बड़ी बेसब्री से अगली छुट्टियों का इंतजार करने लगता।

राहुल अब बड़ा हो गया था, नौकरी भी करने लगा था गाँव से काफी दूर किसी दूसरे शहर में, लेकिन आज भी उसे गाँव जाने की उत्सुकता उतनी ही रहती जितनी पहले हुआ करती थी। जब भी उसे छुट्टी या मौका मिलता वह अपने गाँव जरुर जाता।