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अंधेरा

एक दिन एकांत में बादशाह के मन में यह प्रश्न उठा कि संसार में ऐसी कौन सी वस्तु है जिस पर चद्र्मा या सूरज कि निगाह न पड़ती हो। बहुत देर तक विचार करते रहने पर भी जब उनके दिमाग मे कोई बात नहीं आई तो बादशाह ने यही समझा की सूरज और चद्र्मा प्रत्येक वस्तु को देखते हैं।

कुछ समय बीतने पर बादशाह के ध्यान मे आया कि ‘ यह बात शायद हमारे दरबार में कोई बता दें’ यह सोच कर एक दिन उन्होंने दरबार में सब के सामने यही प्रशन रखा।



उपस्थित मंडली में ‘मुड्मुंडे मतिभिन्ना’ वाली कहावत प्रसिद्ध हो रही थी। किसी की भी बात ऐसी ना थी जो उचित और मान्य होती।

बाद मे बीरबल ने कहा ,” पर जहापनाह ,मेरी समझ मे इस संसार मे अंधेरा हि एक ऐसी वस्तु है जिस पर न तो सूरज की ही किरण पड़ती है और चद्रमा की।“

बादशाह तथा उपस्थित सभासदों ने एक स्वर से बीरबल के इस उचित तर्क का अनुमोदन किया।