story

दो दोस्त और जंगल का राक्षस

बहुत समय पहले की बात है की एक छोटा सा गाँव था, उसी गाँव में दो मित्र रहते थे। एक का नाम था गगन और दूसरे का नाम मगन था। गगन चालाक और बुद्धिमान था, क्योंकि वह पढ़ने जाता था, पर मगन ना ही चालाक था ना ही बुद्धिमान। वह बिल्कुल अनपढ़ और भोला था, यहाँ तक की उसने स्कूल का मुंह भी नही देखा था। घर में गरीबी होने के कारण वह पढ़ न सका और छोटी उम्र में ही काम करने लगा।

गगन हमेशा मगन के सामने अपना घमंड दिखाया करता था कि मै तुमसे कितना चालाक और बुद्धिमान हूँ, मगर मगन कभी भी इन बातों का बुरा नही मानता था।

वो कहता था हा यार मै अनपढ़ भला कैसे बुद्धिमान हो सकता हूँ।

समय के साथ धीरे -धीरे दोनों मित्र बड़े हो गए।



एक दिन दोनों मित्रों ने आपस में बात की, कि चलो कही घूमने चलते है। मगन ने कहा कि चलो आज उस पास के जंगल में चलते है। दोनों मित्र टहलते-टहलते गाँव से दूर उस जंगल में आ गए।

चारो तरफ़ घने पेड़ के जंगल थे।

गर्मी बहुत तेज थी गगन को तेज प्यास लगी, गगन कहने लगा अगर थोडी देर में मुझे पानी नही मिला तो शायद मै प्यास से मर जाऊ। मगन ने गगन को एक पेड़ के छाये में लिटा दिया और ख़ुद पानी ढूढ़ने के लिए जंगल कि तरफ़ चल दिया।

भटकते- भटकते आखिरकार वो एक कुएं के पास पहुँच ही गया। उस कुएं के पास के पेड़ पर दो बड़े राक्षस रहते थे। कुएं का पानी मुहं तक लबालब भरा था, मगन को भी अब प्यास लग गई थी।

वो झुक कर पानी पीने लगा, पानी पीने कि आवाज सुनकर पेड़ से दोनों राक्षस धड़ाम से जमीं पर कूद पड़े।

मगन अचानक आवाज सुनकर थोड़ा डर गया उसने पीछे देखा तो दो बड़े राक्षस खडे थे। दोनों राक्षस ने मगन से पूछा कि तुम कौन हो और यंहा पर क्या कर रहे हो।

मगन बहादुर था उसने बिना डरे बताया कि मेरा नाम मगन है, और मै पास के गाँव का रहने वाला हूँ। मै और मेरा दोस्त गगन आज इधर घूमने आये थे। मेरा दोस्त अभी प्यास से बेहाल होकर पेड़ के पास पड़ा है, मै उसके लिए पानी लेने आया हूँ ।

मगन के निडरता और दोस्त के लिए प्यार देखकर दोनों राक्षस बहुत खुश हुए , दोनों राक्षसों ने कहा कि हम दोनों भी दोस्त है और हम दोनों एक दूसरे के लिए जान भी दे सकते है।

उन्होंने मगन को एक बर्तन में पानी तथा ढेर सारे मिठाई, फल दिए, और कहा अपने दोस्त को खिलाना और हमेशा अच्छे दोस्त बनकर रहना।

मगन पानी और मिठाई लेकर गगन के पास पंहुचा, उसे पानी पिलाया और फ़िर दोनों ने जमकर मिठाई और फल खाया, साथ ही मगन ने गगन को उन दोनों राक्षस कि बात भी बताई कि किस तरह पानी लेते हुए वे दोनों भले राक्षस आ गए थे, और उन्होंने ने ये फल और मिठाई दिए।

गगन को कहानी सुनते - सुनते आँखों से आंसू आ गए कि किस तरह मगन ने अपने जान की परवाह न करते हुए उसकी जान बचाई, साथ ही गर्व भी हुआ कि उसका दोस्त कितना बहादुर है।

मगर अपने पर शर्मिंदा होने लगा कि मै किस तरह मगन को नीचा दिखाता था, और अपने पर घमंड करता था।

गगन रोते हुए अपने गलतियों के लिए मगन से माफ़ी मांगने लगा, मगन ने उसे गले लगाते हुए कहा, धत पगले दोस्तों में माफ़ी मांगते है, इतना कहते-कहते मगन के भी आँखों से आंसू टपकने लगे। दोनों दोस्त वापस अपने गाँव आये और खूब मजे से प्रेम पूर्वक रहने लगे।