story

नेकलेस

शीला बहुत ही खुबसुरत और महत्वाकांक्षी महिला थी| जिसका जन्म एक साधारन परिवार मे हुआ था| वह अपनी ज़िंदगी ऐश और आराम से बिताना चाहती थी| बड़े लोगों की तरह उसे शान और शौकत बहुत पसंद थी| पर वह अपनी गरिबी से बहुत धु:खी थी| शीला की शादी भी एक साधारण परिवार मे हुई और उसके पती भी बिल्कुल सीधे - सादे थे|

एक बार उसे और उसके पति को रेल मंत्री के यहाँ होने वाले पार्टी से निमंत्रण आया| लेकिन इस निमंत्रण को पा कर शीला का दु:ख और भी बढ़ गया क्युँकि अमिरो की पार्टी मे जाने के लिये उस के पास अच्छे कपड़े नहीं थे| पति ने कौड़ी कौड़ी कर के बचाये हुये अपने चार सौ रुपये खर्च कर के अपनी पत्नी के लिये एक नई वस्त्र बनवा दीये| लेकिन एक और परेशानी यह थी कि शीला के पास कोई आभूषण नहीं थी| इस की भी एक तरकीब निकल आई और वह अपनी मित्र इंदु से हीरो का हार माँग कर ले आई|

उस पार्टी में सब से अधिक सुंदर शीला ही दिखाई दे रही थी| बड़े बड़े अफसरों की पत्नियो को उस से ईर्ष्या होने लगी|हर पुरुष उस से परिचय करना चाह्ता था|वह बड़े ही उत्साह से पूड़ी रात नाचती रही|

सुबह जब अपने पति के साथ लौटी तो उस का अभिमान और भी बढ़ गया था|लौटते समय सर्दी से बचने के लिये जो कोट वह अपने साथ ले के आयी थी वो उस पे बिल्कुल जच नहीं रही थी और बस यु ही बातें करते करते कब समय बीत गई और सुबह ने अपनी दस्त्क दे दी उन दोनों को पता ही नहीं चला, पर जब वो अपने घर पहुँच कर कपड़े बदल रही थी तो अचानक से चिख उठी कि उस का हिरो का नेकलस उसके गले मे नहीं है|



यह सुनते ही उसके पति के होश ही उड़ गये| उन्हें आँफिस भी जाना जरुरी था, पर वह आँफिस ना जा कर नेकलेस ढूढने निकल गये|पुरे दिन नेकलेस ढूढने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी और शाम को वो खाली हाथ घर वापस लौट आये|अब शीला और उसके पति के लिये ये बहुत ही बड़ी समस्या थी कि अब वो नेकलेस कहाँ से वापस करेंगे|

उन दोनों ने विचार किया कि अब नया नेकलेस ही खरीद के वापस दे देंगे|पर नया नेकलेस का दाम भी छतीस हजार था|नेकलेस खरीदने के लिये शीला के पति ने अपने बुरे वक़्त में काम आने वाले फिक्स जमा पैसे को तोर कर और कुछ दोस्तों से उधार ले के खरीदा | अगले सुबह शीला ने अपनी दोस्त के घर जा कर उसका हार वापस कर दिया|

अब लिये हुए कर्ज को चुकाने के लिये शीला और उसके पति अपना बड़ा घर छोड़ कर एक छोटे से घर मे शिफ्ट हो गये|अब शीला ने नौकरानी को भी हटा दिया और घर का सारा काम खुद से करने लगी|अबग गली में लगे नल से पानी लाना ,कपड़े धोना, खाना बनाना,बाज़ार से सामान लाने का सारा काम शीला को खुद ही करना परता था| अब शीला एक एक पैसे के लिये दुकानदार से बक झक करती रहथी थी ताकि कर्ज़ जल्दी से जल्दी चुक जाये|

उसके पति भी पुरे दिन आँफिस मेँ काम कर के शाम को दुकानदार के हिसाब गिताब की भी देख रेख करता था ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसा जमा हो पाये और ज्ल्द से ज्ल्द कर्ज़ खत्म हो जाये|

इसी तरह से एक एक दिन करते करते समय बितता गया और दस साल गुजर गये, और धीरे धीरे कर के कर्ज़ भी चुक गया|

पर अब शीला कि भी उम्र हो गयी और अब वो भी बूढी दिखने लगी थी| अब वह, मज़दूरो की स्त्रीयोँ की तरह हृष्ट-पुष्ट सी दिखने लगी| उस मे अब वो नज़ाकत नहीं दिखती थी| उस के बाल अस्त व्यस्त से रहते ,कपड़े सस्ते ,गरीबो जैसे और रुचिहीन |जब वो फुरस्त मे रहती तो उसी रात को याद करती रहती और सोचती रहती यदि उस रात वह नेकलेस नहीँ खोया होता तो आज उसकी ज़िंद्गी कैसी होती?

एक शाम वह सारी बातो को भूल कर पार्क मे घुम रही थी तभी उसे उसकी दोस्त इंदु दिखी जो अपने बेटे को पार्क मे घुमा रही थी|साहस कर के शीला ने उसे आवाज़ दी|पहले तो उस ने अपनी दोस्त को पहचाना हि नहीँ पर फिर परिचय देने के बाद पहचान लिया और उस कि इस हालत का कारण पूछा|

“यह सब तुम्हारी वजह से हुआ हैँ”| शीला ने कहा|

“मेरे कारण ?”

“तुम्हेँ वो नेकलेस याद हैँ जो तुमने मुझे दिया था|”

“हाँ”

“वह मुझ से खो गया था”|

“तुम ने तो वह वापस कर दिया था,फिर खोया कैसे!”

“मैंने वैसा हि नया खरीद के तुम्हेँ वापस किया था|और उस कि किमत चुकाने मे मेरी यह हालत हो गयी| खैर अब मैँ खुश हुँ|”

“तो तुमने असली हिरो का नेकलेस खरीद कर मेरा नेकलेस वापस किया?” इंदु ने पुछा शीला से| उस ने हामी भर दी

“शीला को यह जान कर बहुत खुशी हुई कि इंदु को अभी तक नेकलेस बदल जाने का पता ही नहीं चला|”

अब इंदु तुरंत ही शीला के गले लग गई और बोली की मेरे नेकलेस की कीमत तो बस पाच हजार थी…..और वो नकली हिरो का था|