story

सगे भाई

स्कूल मास्टर का नाम रोहित था। उस का एक भाई था, मोहित । वो एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते थे, वो हर काम एक साथ करते थे। दोनों की किस्मत भी एक ही तरह की थी। दोनों ने एक ही साथ सेना में भर्ती के लिए आवेदन पत्र भरा और दोनों का बुलावा भी एक ही साथ आया। वहाँ भी दोनों को एक ही जगह पे नियुक्ती मिली । लड़ाई खत्म होने के बाद जब दोनों वापस आये तो सब ने उनको देख कर बोला की फौज में रह कर और भी बलवान हो गये है।

उन दोनों के पिता ने उन दोनों के लिए कुछ सम्पती छोर कर गये थे जिसका बट्वारा करना बहुत ही मुश्किल था। दोनों भाई ने तय किया कि हम अपने अपने हिस्से को नीलाम कर देगे, और दोनों भाईयो में से जिस को जो चीज प्यारी होगी वो उसकी किमत दे के उस चीज को खरीद लेगा। नीलामी से जो पैसे आयेगे वो दोनों आपस में बाँट लेगे। फिर उन दोनों ने वैसा ही किया।

उस के पिता ने एक सोने कि घड़ी छोड़ कर गये थे और उस ईलाके में इस के पिता के ही पास सोने की घड़ी थी, दुर दुर तक किसी के पास नहीं थी । इस वजह से इस सोने कि घड़ी के बड़े चर्चे थे। जब घड़ी की बोली लगाने की बारी आई तो दुर दुर से अमीरो की कतार लग गयी ,उस घड़ी को पाने के लिए।सब ने जोर शोर से बोली लगाज़, पर जब दोनों भाई भी बोली लगाने लगे तो बाकि सब चुप हो गये।



रोहित ने सोचा की मोहित उसे वो घड़ी लेने देगा, और मोहित ने भी यही सोचा। अब दोनों बारी बारी से बढ चढ कर बोली लगाने लगे। बोली लगाते लगाते घड़ी का दाम चालीस हजार तक पहुँच गया। अब दोनों को एक दुसरे पर बहुत गुस्सा आ रहा था और दोनों एक दुसरे को कोसे जा रहे थे। अब दोनों क गुस्सा ईतना बढ गया कि दोनों एक दुसरे को भला बुरा कह के वहाँ से जाने का सोचने लगे। नीलामघर में सन्नाटा छा गया. सिर्फ नीलाम करने वाले की शांत आवाज गूँज रही थी “ चालीस हजार , चालीस हजार, चालीस हजार ”.

रोहित सोच रहा था कि अगर मोहित के पास इस से ज्यादा पैसे है तो ज्यादा बोली लगाये और घड़ी खरीद ले|

इधर मोहित को अंदर ही अंदर बहुत बेईजती महसूस हो रही थी और यही सोचते सोचते उसने बोली बढा के बोली “पचास हजार”।

निलाम घर में सन्नाटा छाया था। रोहित ने सोचा कि में रा भाई में रा ही अपमान करना चाहता है पर मै ऐसा होने नहीं दूँगा और उसने बोली बढा के बोली ।

“अस्सी हजार” रोहित ये सुनते हि निलामघर से बाहर निकल गया और सोचने लगा कि मेरा भाई भी आज सौदा करने को निकला है । निलामी में खरीदे गये घोड़े की जीन कसने लगा, तभी एक आदमी बाहर आ के बोला कि घड़ी अब मोहित की हो गई।

यह बात सुनते हि उस ने मन ही मन अपने भाई के चरित्र के बारे में सोच कर अफसोस कर रहा था कि कल तक जो भाई मेरे बिना कोइ काम नहीं करता था आज अपने भाई के साथ अपने पिता के घड़ी के लिये बोली लगा रहा था। यही सोचते वो अपने घोड़े पे सवार हो के जैसे जाने लगा उसे मोहित दिखा और उसने चिल्ला के बोला आज से तुम मेरे लिये मर चुके हो, आगे से मेरा कोई नहीं है इस दुनिया में और चला गया।

“ना हि मैं कभी तुम्हारे दरवाजे पे अपनी परछाई लाऊगा.!” मोहित ने जबाब दिया। उस दिन के बाद उन दोनों मे से किसी के अपने बाप के पुराने घर में कदम तक नहीं रखा।

कुछ दिन बाद रोहित ने एक किसान की बेटी से शादी कर ली। उस ने अपने शादी में मोहित को नहीं बुलाया। और मोहित गया भी नहीं । शादी के पहले साल ही रोहित कि गाय मर गयी। एक दिन सुबह जब वो उठा तो उसे उसकी गाय मरी हुई मिली।

काफी दिन बित गये पर किसी को पता नहीं चल पाया की उसकी गाय कैसे मरी। ईस के बाद रोहित को कई मुसिबतों का सामना करना परा, पर सबसे ज्यादा नुकसान तब हुआ जब उसके खेतों में आग लग गई और सारे खेत जल कर राख हो गये।

रोहित ने सोचा कि ये किसी दुश्मन का काम है। उस दिन वो सारी रात नहीं सो पाया। अब वह पूरी तरह बर्बाद हो गया , उस के सारे पैसे खत्म हो गये थे, उसका सारा उत्साह ख्त्म हो गया था कोई भी नया काम शुरु करने का।

आग लगने की खबर सुन कर मोहित अपने भाई से मिलने उसके घर गया। उस वक्त रोहित लेट कर कुछ सोच ही रहा था तभी उसने मोहित को देखा और उठ कर खड़ा हो गया।

और बोला “ क्यु आया है यहाँ पे ?” मेंरी हालात का मजाक बनाने।

“मै तुम्हारी मदद करने आया हूँ।” मोहित ने बोला।

“तुम्हारे तो दिल कि मुराद पूरी हो रही है! चले जाओ यहा से तुरंत वरना पता नहीं मै क्या कर बैठू ?” रोहित ने बोला।

“भाई तुझे गलतफहमी हुई है.मोहित ने बोला”

“मोहित, चले जाओ, वरना आज हम दोनों में से कोई एक ही बच पायेगा !”

मोहित एक कदम पिछे हटा।

“ तुम चाहो तो घड़ी...” मोहित की आवाज काँप रही थी।

“मोहित ,चले जाओ! रोहित चीखा।

मोहित चला गया...

वहाँ से आने के बाद मोहित को पशचाताप होने लगा। किसी भी तरह वह अपने भाई कि मदद करना चाहता था। अब उसने निश्चित किया कि वह अपने पुराने गलती को किसी भी तरह से सुधारेगा। कई बार वह अपने भाई के पास जाना चाहता था पर जाने कि हिम्मत नहीं होती थी।

एक शाम वह अपने भाई के घर के बाहर पहुँच कर रुक गया और आहट लेने लगा। उसने सुना कि उसकी पत्नी उसके बारे में ही बात कर रही थी और कह रही थी की मेरे विचार से उसे तुम्हारी चिंता है ईसलिए वो तुम्हारी मदद करने आये थे।

“नहीं वह मेरी बारे में नहीं सोचता हैं ,रोहित ने जबाब दिया.”मैं उसे जानता हूँ वह सिर्फ अपने बारे में सोचता हैं”।

फिर थोड़ी देर तक कोई आवाज नहीं आई। उस ठढी रात में मोहित के पसीने छूट रहे थे बाहर खडे हो के । रोहित कि पत्नी कुछ बना रही थी पतीले में । अंगीठी से कोयलों के चटकने की आवाज आ रही थी और एक बच्चे की रोने कि आवाज आ रही थी और रोहित उस बच्चे को सुलाने कि कोशिश कर रहा था।

फिर उसकी पत्नी बोली “ मुझे तो पुरा विश्वास हैं कि तुम दोनों हमें शा एक दूसरे के बारे में सोचते रहते हो, लेकिन तुम दोनों इस बात को स्वीकार नहीं करते हो।”

“कुछ और बात करो,” रोहित ने बोला।

थोड़ी देर बाद रोहित बाहर निकल रहा है, ऐसा मोहित को लगा तो वह वही छिप गया ताकि रोहित उसे देख ना ले।

रोहित बाहर निकल कर अपने खेत कि तरफ गया कुछ लकड़ी लाने को। एक कोने मेँ छिपे हुए मोहित को रोहित पूरी तरह दिख रहा था, उसने अपनी सेना वाली वर्दी पहन रखी थी। दोनों भाईयोँ ने एक दुसरे से वादा किया था कि भविष्य में अपनी वर्दी नहीँ पहनेगें, अपने परिवार और बच्चोँ को यादगारी के तौर पर दिखायेगें। लेकिन कपड़े की कमी की वजह से उसे सेना की वर्दी पहननी पड़ी जो कई जगह से फट चुकी थी। रोहित को देख के लग रहा था कि उसका शरीर फटे चीथडो से लिपटा हो।

रोहित लकड़ी का गटठर उठाने गया लेकिन लकड़ी उठाने के बजाय वह एक गटठर के सहारे पिछे को झुक कर खड़ा हो गया और सितारोँ से चमचमाते हुए आकाश की ओर देखने लगा ,और अपनेआप बड़बड़ा उठा ,मानो चिंताओं के बोझ से दबा जा रहा हो: “ओह ...आह...आह...”।

जब तक मोहित जिंदा रहा अपने भाई के ये शब्द कभी भुला नहीं सका। मोहित का मन हुआ कि वो बाहर निकल कर अपने भाई को गले से लगा ले लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकता था। रोहित लकड़ी का गटठर उठा के अपने झोपड़ी की तरफ जाने लगा।

मोहित वही खड़ा हो के बस देखता रहा ।पता नहीं भावनाओं के तूफान ने उसे अंदर से ईतना कंपकंपा दिया था कि अब उसे अपने भाई के घर जाने कि हिम्मत नहीं हो रही थी।

इस पर उस ने एक और तरकीब सोची और वही जल रहे आग के सहारे खेत के छ्प्पर में खूंटी ढूढने लगा, जिस पर सुबह रोहित लालटेन लटकाया करता था। खूंटी मिलने पर मोहित ने सोने की घड़ी उस पर लटका दी और बिना इधर उधर देखे चुपचाप बाहर चला गया।

उसके बाद उसे ईतना हल्का महसूस हो रहा था जैसे कि वह बर्फ पर बच्चों कि तरह दौड़ कर चल रहा हो।

अगली सुबह उस ने सुना कि रात में खेत में आग कि वजह से सारा खेत जल कर राख हो गया।

इस समाचार से मोहित का मन बहुत दु:खी हो गया । वह अपने आप को कमरे में बंद कर लिया और पागलो कि तरह करने लगा। आस पास के लोग भी उसे पागल समझने लगे।

कुछ दिनों के बाद वह अपने भाई की घर कि तरफ गया। खेत की राख के ढेर में उस ने खोदना शुरु किया और उसे पिघल कर जमें हुए सोने का ढेर मिला- यही उस घड़ी का बाकी बचा था।

सोने के इस टुकडे को ले के वो अपने भाई के घर के पास गया-उसे सब कुछ बताने और फिर से एक होने को।लेकिन वहां क्या हुआ –यह पहले बताया जा चुका हैं।

उस रात एक औरत ने मोहित को देख लिया था खेत में खुदाई करते।

अब रोहित ने शराब पिनी शुरु कर दी। उस कि हालत दिन ब दिन और बिगड़ने लगी। इधर मोहित के साथ और भी बुरा हुआ। हालांकि उसने शराब पिनी नहीं शुरु की फिर भी उसे पहचानना मुश्किल हो गया।

एक शाम को अंधेरा होने के बाद एक महिला मोहित के घर पे आई, उसे अपने साथ चलने को कहीं। मोहित ने तुरंत पहचान लिया ये उस के बड़े भाई कि पत्नी थी। बिना बताए भी मोहित उस के आने का कारण समझ गया और अपनी भाभी के साथ चल दिया।

के साथ चल दिया। रोहित के घर में एक पिली बत्ती टिमटिमा रही थी । बर्फ कि वजह से रास्ता भी नहीं दिख रहा था पर उसी बत्ती के सहारे वो सही दिशा में बढ रहे थे।

घर के अंदर से बहुत बदबू आ रही थी , वो दोनों घर के अंदर गये ।एक छोटा बच्चा नीचे बैढा हुआ था और चुल्हे से कोयला निकाल कर खा रहा था। उसका सारा चेहरा काला हो गया था, लेकिन अपनी माँ को देख कर हँसा ।

बिस्तर पर रोहित लेटा हुआ था –पिला, दुबला पतला । उस का माथा बड़ा और चिकना लग रहा था। भाई को देखते ही उसे मानो नई ज़िंदगी मिल गयी थी, दोनों एक दुसरे के गले लग के रोने लगे।

रोहित अपने भाई को एक टक देख रहा था, और बोला कुछ नहीं। उस ने अपनी पत्नी को बाहर जाने को कहा, लेकिन मोहित ने उसे वही पे रोक लिया। इस के बाद उन दोनों ने अपनी बातें करनी शुरु की। उन दोनों ने घड़ी की निलामी वाले दिन से लेकर आज तक इतने साल में दोनों पे क्या क्या बिती, सब सुना कर मन को हल्का किया। मोहित ने अपनी बातें समाप्त होने के बाद अपने पाकेट से वह सोने का टुकडा निकाला जो वो हमें शा अपने साथ रखता था। उन की बातचीत से यह साबित हो गया था कि इतने सालो में दोनों खुश नहीं थे।

रोहित ज्यादा नहीं बोल पाया क्युँकि कि उस में उतनी शक्ति नहीं बची थी। दोनों ने निश्चय किया कि अब दोनों एक साथ रहेंगे ,जैसे पहले रहते थे।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उसी रात रोहित कि मृत्यु हो गयी।

अब रोहित कि पत्नी और उसकी बच्ची मोहित के साथ रहने लगे। मोहित उन का ख्याल बिल्कुल अपनों कि तरह रखने लगा।

उस रात दोनों भाईयों में जो बातें हुई थी कि अब वो फिर से साथ रहेगें वो अधुरी रह गई।